धुरंधर 2 जैसी फिल्म पसंद आई? तो D-Day है आपके लिए परफेक्ट अंडररेटेड थ्रिलर

अगर आपने धुरंधर 2 देखी है और उसके बाद आपके मन में यह सवाल आया है कि क्या बॉलीवुड में इससे पहले भी ऐसी कोई फिल्म बनी थी जो दाऊद इब्राहिम, अंडरवर्ल्ड, पाकिस्तान, सीक्रेट एजेंट्स और रियलिस्टिक मिशन को इतनी गंभीरता से दिखाती हो, तो जवाब है — हाँ, और उसका नाम है D-Day
यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि ऐसा इंटेंस स्पाई-थ्रिलर एक्सपीरियंस है जिसे कई लोगों ने उसकी रिलीज़ के समय उतनी अहमियत नहीं दी, जितनी वह डिज़र्व करती थी। आज के समय में अगर यह फिल्म दोबारा रिलीज़ हो जाए, तो यकीन मानिए इसका क्रेज कई बड़ी फिल्मों को टक्कर दे सकता है।

क्यों लोग धुरंधर 2 के बाद D-Day को याद कर रहे हैं?

धुरंधर 2 देखने के बाद बहुत से दर्शकों को लगा कि फिल्म में दाऊद इब्राहिम जैसे किरदार के साथ और ज्यादा गहराई, और ज्यादा खतरा और और ज्यादा संतोषजनक अंत होना चाहिए था।
कुछ लोगों को यह भी महसूस हुआ कि फिल्म के कुछ किरदार उतना प्रभाव नहीं छोड़ पाए, जितनी उम्मीद की जा रही थी। ऐसे में D-Day एक ऐसी फिल्म बनकर सामने आती है जो सिर्फ स्टाइल नहीं दिखाती, बल्कि खौफ, राजनीति, जासूसी और बदले की असली कीमत भी महसूस कराती है। यह फिल्म आपको सिर्फ कहानी नहीं सुनाती, बल्कि आपको उस मिशन के बीचोंबीच खड़ा कर देती है जहाँ हर फैसला जिंदगी और मौत के बीच का फर्क बन जाता है।

D-Day की कहानी: भारत के मोस्ट वांटेड को जिंदा पकड़ने का मिशन

D-Day की कहानी एक बेहद खतरनाक मिशन पर आधारित है। फिल्म का मकसद साफ है —
भारत के सबसे मोस्ट वांटेड अपराधी को पाकिस्तान से जिंदा पकड़कर वापस लाना। कहानी में अचानक खबर मिलती है कि डॉन अपने बेटे की शादी के सिलसिले में बाहर निकल सकता है। बस यही वह मौका है जिसका इंतजार भारतीय एजेंसियाँ सालों से कर रही होती हैं। इसके बाद पाकिस्तान में मौजूद भारतीय सीक्रेट एजेंट्स एक-एक करके एक्टिव हो जाते हैं और शुरू होता है ऐसा मिशन जिसमें हर कदम पर धोखा, डर, खून और बलिदान छिपा हुआ है। यही वह चीज़ है जो इस फिल्म को एक साधारण एक्शन फिल्म से ऊपर उठाती है।

ऋषि कपूर का खतरनाक अवतार: ऐसा विलेन जिसे भूलना मुश्किल है

अगर इस फिल्म की सबसे बड़ी ताकत की बात करें, तो वह हैं ऋषि कपूर
जो लोग उन्हें सिर्फ रोमांटिक या फैमिली रोल्स में जानते हैं, उनके लिए D-Day में उनका किरदार किसी बड़े झटके से कम नहीं है। उन्होंने फिल्म में जिस तरह अंडरवर्ल्ड डॉन का रोल निभाया है, वह बॉलीवुड के सबसे डरावने और प्रभावशाली विलेन परफॉर्मेंस में गिना जा सकता है। उनकी आवाज, उनकी बॉडी लैंग्वेज, उनके डायलॉग्स और उनके चेहरे का ठंडा आत्मविश्वास — सब मिलकर ऐसा असर पैदा करते हैं कि दर्शक असहज महसूस करने लगते हैं। उनका एक लंबा डायलॉग आज भी उन लोगों के लिए जवाब जैसा लगता है जो हर देशभक्ति या अंडरवर्ल्ड फिल्म को सिर्फ “प्रोपेगेंडा” कहकर खारिज कर देते हैं।

इरफान खान और अर्जुन रामपाल ने फिल्म को बनाया और ज्यादा दमदार

इरफान खान इस फिल्म की आत्मा हैं।
उनकी स्क्रीन प्रेजेंस इतनी मजबूत है कि बिना ज्यादा शोर मचाए भी वह हर सीन पर छा जाते हैं। उनका किरदार सिर्फ मिशन नहीं कर रहा होता, बल्कि अपने अंदर बहुत कुछ छिपाए हुए चलता है। यही वजह है कि फिल्म के आखिरी हिस्से में उनका ट्रैक दर्शकों को अंदर तक हिला देता है। वहीं अर्जुन रामपाल का किरदार फिल्म में एक अलग अंधेरा लेकर आता है। वह सिर्फ एक्शन के लिए नहीं हैं, बल्कि कहानी के सबसे बेचैन और खतरनाक हिस्सों से जुड़े हुए हैं। उनका शांत लेकिन हिंसक अंदाज फिल्म को और ज्यादा अस्थिर और थ्रिलिंग बना देता है।

श्रुति हासन का रोल: फिल्म का सबसे डार्क और इमोशनल हिस्सा

इस फिल्म का सबसे संवेदनशील और भारी हिस्सा है श्रुति हासन का ट्रैक।
उनका किरदार सिर्फ कहानी में एक साइड एंगल नहीं जोड़ता, बल्कि फिल्म को स्पाई मिशन से रिवेंज ड्रामा की तरफ मोड़ देता है। उनके साथ जो होता है, वह फिल्म के सबसे दर्दनाक और विचलित कर देने वाले हिस्सों में से एक है। यही कारण है कि D-Day सिर्फ मिशन या गोलीबारी की फिल्म नहीं रह जाती, बल्कि यह इंसानी टूटन, गुस्से और न्याय की तलाश की कहानी भी बन जाती है।

धुरंधर 2 और D-Day में सबसे बड़ा फर्क क्या है?

जहाँ धुरंधर 2 आपको बड़े स्केल, थ्रिल और कमर्शियल ट्रीटमेंट के साथ एंटरटेन करती है, वहीं D-Day आपको ज्यादा रॉ, ज्यादा गंभीर और ज्यादा रियल अनुभव देती है। इस फिल्म में एक्शन है, लेकिन उससे ज्यादा तनाव है। गोलीबारी है, लेकिन उससे ज्यादा डर है। देशभक्ति है, लेकिन उससे ज्यादा मिशन की कीमत है।यही वजह है कि D-Day उन लोगों के लिए एक must-watch Bollywood spy thriller है जो सिर्फ मसाला नहीं, बल्कि दमदार कहानी और खतरनाक माहौल भी चाहते हैं।

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